चाँद के इंतज़ार में… क्या है करवा चौथ की कहानी 2025- व्रत, परंपरा और प्रेम का प्रतीक
“साजन के नाम का व्रत है साजन के लिए, करवा चौथ का त्यौहार है प्रेम और श्रद्धा से भरा एक दिन।”*
भारत में जब बात पति-पत्नी के रिश्ते की आती है, तो कई त्यौहार इस पवित्र बंधन को और मजबूत करने का काम करते हैं। इन्हीं में से एक है – करवा चौथ। साल 2025 में करवा चौथ का त्योहार 12 अक्टूबर, रविवार को मनाया जाएगा।
करवा चौथ क्या है?- करवा चौथ मुख्यतः उत्तर भारत में मनाया जाने वाला एक व्रत है, जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए उपवास करती हैं। यह व्रत सूर्योदय से चंद्रमा के दर्शन तक निर्जला (बिना पानी के) रखा जाता है। आज के दौर में जहां रिश्तों में भाग-दौड़ और व्यस्तता बढ़ गई है, करवा चौथ जैसे पर्व हमें रुककर यह याद दिलाते हैं कि प्रेम, समर्पण और आस्था आज भी ज़िंदा है।
करवा चौथ क्यों मनाया जाता है?- आस्था से जुड़ा एक अनमोल व्रत करवा चौथ का पर्व सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते की मजबूती और विश्वास का प्रतीक है। यह पर्व दर्शाता है कि एक स्त्री अपने जीवनसाथी के लिए कितनी श्रद्धा, प्रेम और समर्पण रखती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार:- करवा चौथ की उत्पत्ति से जुड़ी कई कथाएँ मिलती हैं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध कथा वीरवती की है:
वीरवती की कथा:- एक बार की बात है, वीरवती नाम की एक सती नारी ने अपने पहले करवा चौथ व्रत में पूरे नियमों का पालन किया, लेकिन चंद्रमा के देर से निकलने पर वह भूख-प्यास से बेहाल हो गई। उसके भाइयों ने चंद्रमा का नकली दर्शन करवा कर व्रत तुड़वा दिया। इसके बाद उसके पति की मृत्यु हो गई। वीरवती ने साल भर तप और प्रार्थना की, और करवा चौथ के अगले व्रत पर यमराज को प्रसन्न कर अपने पति को जीवनदान दिलाया।
इस कहानी से यह संदेश मिलता है कि नारी की आस्था, संयम और प्रेम में इतनी शक्ति होती है कि वह मृत्यु जैसे संकट को भी टाल सकती है।
करवा चौथ 2025 की तिथि व शुभ मुहूर्त
तारीख: 10 अक्टूबर 2025, सुक्रवार
चतुर्थी तिथि आरंभ: 9 अक्टूबर को रात 10:55 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 10 अक्टूबर को शाम 07:40 बजे
चंद्रोदय (चंद्रमा निकलने का समय): लगभग रात 8:10 बजे (स्थान के अनुसार थोड़े अंतर हो सकते हैं)
व्रत पूजन का शुभ मुहूर्त: शाम 5:30 से 7:35 बजे तक (स्थानीय पंचांग के अनुसार जाँचना उचित है)
व्रत की तैयारी: परंपरा और आधुनिकता का मेल करवा चौथ की तैयारी कई दिन पहले से शुरू हो जाती है। महिलाएं मेहंदी लगवाती हैं, नए कपड़े खरीदती हैं और श्रृंगार की सामग्रियाँ इकट्ठा करती हैं। दिन की शुरुआत एक विशेष थाली होती है जिसे सास अपनी बहू को भोर में देती हैं। इसमें मिठाई, सूखे मेवे और अन्य पौष्टिक चीजें होती हैं।
आज के युग में बहुत-सी कामकाजी महिलाएं भी पूरे समर्पण से व्रत रखती हैं। फर्क बस इतना है कि अब यह त्यौहार सिर्फ परंपरा नहीं, एक इमोशनल बॉन्डिंग का जरिया बन गया है।
पूजन विधि
1. दोपहर के बाद महिलाएं सज-धज कर करवा माता की पूजा करती हैं।
2. मिट्टी की करवा (घड़ा) में पानी और गेहूं भरकर माँ गौरी, शिव और गणेश की पूजा की जाती है।
3. कथा सुनी जाती है – “करवा चौथ व्रत कथा”, जो इस व्रत की पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी होती है।
4. रात को चंद्रमा के दर्शन कर, अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। पति के हाथों से पानी पीकर उपवास समाप्त होता है।
भावनाओं का त्यौहार करवा चौथ का असली आकर्षण इसके पीछे छुपा प्यार और समर्पण है। यह दिन सिर्फ महिलाओं का नहीं, बल्कि अब बहुत से पति भी अपनी पत्नियों के साथ व्रत रखते हैं -यह इस रिश्ते की समानता और समझदारी को दर्शाता है।
सोशल मीडिया के ज़माने में भले ही करवा चौथ के फोटो और रील्स दिखावटी लगें, पर घर के अंदर जो एक निजी और सच्चा भाव होता है वह अब भी अनमोल है।
आज की पीढ़ी और करवा चौथ
करवा चौथ को लेकर युवाओं की सोच थोड़ी अलग हो सकती है कुछ इसे रूढ़िवादिता मानते हैं, तो कुछ इसे एक सुंदर परंपरा। सच यह है कि परंपराएं जब प्रेम और समझदारी के साथ निभाई जाती हैं, तो वे बोझ नहीं लगतीं, बल्कि रिश्ते को और मजबूत बनाती हैं।
करवा चौथ 2025 का दिन आपके जीवन में प्रेम, समर्पण और साथ का अनुभव करवाए। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि एक रिश्ता सिर्फ साथ जीने का नहीं, बल्कि साथ निभाने का नाम है। चाहे परंपरा हो या भावना दोनों जब मिलती हैं, तो एक ऐसा दिन बनता है जिसे सिर्फ देखा नहीं, महसूस किया जाता है।
“करवा चौथ पर व्रत है मेरा,
तेरे नाम की हर साँस है प्यारा।
चाँद भी शरमा जाए देख हमारा प्यार,
यही तो है इस दिन का असली त्योहार।”