गजब का इनोवेशन प्रयागराज के शैलेंद्र ने बनाया 176 किमी/लीटर का इंजन

गजब का इनोवेशन”: प्रयागराज के शैलेंद्र ने बनाया 176 किमी/लीटर का इंजन – देश को चाहिए ऐसे रत्न!

जब जुनून ही इजाद बन जाए…

कभी-कभी देश के कोने-कोने से ऐसी कहानियाँ निकलती हैं जो न सिर्फ चौंका देती हैं, बल्कि सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि असली “टैलेंट” सिर्फ बड़े शहरों या बड़ी कंपनियों में नहीं होता। इनोवेशन की असली आग तो उन लोगों में जलती है जिनके पास संसाधन कम होते हैं लेकिन हौसले आसमान से ऊँचे।

ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के रहने वाले शैलेंद्र कुमार सिंह की – एक आम इंसान, लेकिन असाधारण सोच और निस्वार्थ देशभक्ति से लबरेज़।

अपनी पूरी संपत्ति बेच दी… लेकिन हार नहीं मानी!- शैलेंद्र जी ने वो कर दिखाया, जो बड़ी-बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियाँ आज तक सिर्फ प्रयोगशालाओं में करने की कोशिश करती रहीं। उन्होंने अपनी सारी जमा-पूंजी, ज़मीन-जायदाद तक बेच दी, सिर्फ इस सपने को पूरा करने के लिए  एक ऐसा इंजन बनाना जो पेट्रोल की खपत को न्यूनतम कर दे, ताकि आम भारतीय का खर्चा कम हो सके और देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने। और आखिरकार, उन्होंने बना डाला एक Six Stroke इंजन, जो 1 लीटर पेट्रोल में 176 किलोमीटर तक की माइलेज देने में सक्षम है!

Six Stroke इंजन क्या होता है?- जहाँ आमतौर पर गाड़ियाँ Four Stroke इंजन पर चलती हैं, वहीं शैलेंद्र जी का बनाया इंजन एक कदम आगे है  ये Six Stroke इंजन है, जिसमें दो अतिरिक्त स्ट्रोक इंजिन की एफिशिएंसी को कई गुना बढ़ा देते हैं।

इसका मतलब?- ज्यादा माइलेज, कम प्रदूषण, इंजन का ज़्यादा कूल रहना लंबे समय तक टिकाऊ प्रदर्शन और भी हो सकता है कमाल…

शैलेंद्र जी का कहना है:- “अगर सरकार हमें तकनीकी सहयोग और रिसर्च का इंफ्रास्ट्रक्चर दे, तो मैं इस इंजन की माइलेज को 200 किमी/लीटर तक ले जा सकता हूँ।”

सोचिए, जहाँ आज की तारीख़ में बड़ी कंपनियाँ भी 60-70 किमी/लीटर से ऊपर नहीं जा पातीं, वहीं एक अकेले भारतीय इनोवेटर ने 200 किमी/लीटर की संभावना खड़ी कर दी है!

मीडिया और सरकार क्यों चुप हैं? सबसे बड़ा सवाल यही है- अगर यही इनोवेशन किसी विदेशी लैब या यूरोप के किसी इंजीनियर ने किया होता, तो आज भारत के न्यूज़ चैनल, अख़बार और सोशल मीडिया उसी की चर्चा कर रहे होते।

लेकिन जब देश का अपना बेटा, अपनी जमीन बेचकर देश के लिए टेक्नोलॉजी बना रहा है, तब वो सिर्फ कुछ चुनिंदा पोस्ट्स तक सिमटकर रह जाता है।

अब हमारी ज़िम्मेदारी है… शैलेंद्र जी जैसे लोग किसी सरकारी स्कीम या पुरस्कार के इंतजार में ये काम नहीं करते वो करते हैं क्योंकि उनके अंदर देश के लिए कुछ करने की आग होती है। लेकिन हमें आपको इस आग को बुझने नहीं देना है।

इस आविष्कार की आवाज़ सरकार तक पहुंचनी चाहिए।

स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं का असली लाभ इन्हीं इनोवेटर्स को मिलना चाहिए।

IITs, NITs और टेक्निकल संस्थानों को इनके साथ मिलकर इस टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाना चाहिए।

आखिर में…शैलेंद्र जी की ये कहानी हमें सिखाती है कि:- अगर इरादे सच्चे हों, तो कोई भी संसाधन आड़े नहीं आता। देश को आगे बढ़ाने के लिए हमें सिर्फ सरकार नहीं, खुद भी ज़िम्मेदारी लेनी होगी। हमें अपने Desi Talent पर भरोसा करना होगा क्योंकि असली भारत वहीं बसता है।

चलिए, इस आवाज़ को इतना फैलाएँ कि सरकार और देश का हर ज़िम्मेदार नागरिक इसे सुने। क्योंकि देश को ऐसे “शैलेंद्र” और उनके जैसे जुनूनी इनोवेटर्स की आज सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

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