गांव से ग्लोबल तक: ZOHO की कहानी

गांव से ग्लोबल तक: ZOHO की कहानी जिसने साबित कर दिया कि सपने सिर्फ शहरों में नहीं पलते

जब हम बिजनेस की बात करते हैं, तो अक्सर दिमाग में बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स, महंगे ऑफिस और मेट्रो सिटीज़ की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटा-सा गांव, सीमित संसाधनों के साथ भी एक ग्लोबल कंपनी की नींव बन सकता है?

ZOHO की कहानी कुछ ऐसी ही है – बिल्कुल उलटी दिशा में चलने वाली, लेकिन आज लाखों लोगों को प्रेरणा देने वाली।

सोच बड़ी हो तो रास्ते खुद बनते हैं – श्रीधर वेम्बु, ZOHO के संस्थापक, एक ऐसा नाम जो आज भारत के सबसे सफल टेक एन्त्रेप्रेन्योर्स में गिने जाते हैं। लेकिन उन्होंने अपनी कंपनी की शुरुआत उन रास्तों से की जहां कोई और देखना भी पसंद नहीं करता – बिना किसी बैंक लोन, बिना बड़ी फंडिंग, और सबसे बड़ी बात बड़े शहरों से नहीं, बल्कि गांव से। शुरुआत में लोग हंसे, किसी ने भरोसा नहीं किया कि गांव में बैठकर कोई हाई-टेक सॉफ्टवेयर कंपनी चला सकता है। लेकिन आज वही लोग ZOHO की सफलता की मिसाल देते हैं।

गांव में बैठकर, दुनिया को जोड़ा – ZOHO की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसने गांव के युवाओं को नौकरी देने के लिए शहर नहीं बुलाया, बल्कि खुद गांव में जाकर उन्हें ट्रेनिंग, तकनीकी ज्ञान और काम का मौका दिया। जहां बड़ी कंपनियां सिर्फ स्किल्स देखती हैं, ZOHO ने इंसान की काबिलियत और सीखने की इच्छा पर भरोसा किया। नतीजा ये हुआ कि हजारों लोग आज अपने गांव में रहकर ही ग्लोबल प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं – बिना शहर की भागदौड़, बिना ट्रैफिक की झुंझलाहट।

ZOHO कैसे कमाती है पैसा? – ZOHO एक सॉफ्टवेयर कंपनी है, जो छोटे व्यापारियों से लेकर बड़ी कंपनियों तक के लिए ऑफिस टूल्स और ऑनलाइन सॉल्यूशन्स बनाती है जैसे ईमेल, अकाउंटिंग, CRM, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट वगैरह।कंपनी का बिजनेस मॉडल बेहद सिंपल लेकिन दमदार है – सब्सक्रिप्शन आधारित। यानी लोग हर महीने या सालाना फीस देकर ZOHO के सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करते हैं। यही लगातार चलने वाली इनकम ZOHO को बहुत प्रॉफिटेबल बनाती है।

पैसा नहीं, ज़िद चाहिए – इस कहानी में सबसे बड़ी सीख ये है कि बिजनेस शुरू करने के लिए पैसा जरूरी नहीं, ज़रूरी है एक साफ सोच, मेहनत और भरोसा। ZOHO ने दिखा दिया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो किसी भी गांव की गलियों से एक नई क्रांति शुरू हो सकती है।

गांव के युवाओं के लिए नया रास्ता- ZOHO ने ना सिर्फ एक कंपनी खड़ी की, बल्कि ये साबित कर दिया कि डिजिटल इंडिया की असली ताकत गांवों में है। अब देश के कई गांवों में युवा ज़ोहो के मॉडल से प्रेरणा लेकर खुद के छोटे-छोटे टेक स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं – बिना किसी डर, बिना किसी बहाने।

अब गांव सिर्फ खेती तक सीमित नहीं जहां पहले गांव का नाम आते ही खेत, ट्रैक्टर और मजदूरी का ख्याल आता था, आज वही गांव कोडिंग, क्लाउड और क्लाइंट डीलिंग में माहिर हो चुके हैं। ZOHO ने ये बदलाव शुरू किया, और अब बाकी भारत उसकी राह पर चल रहा है।

ZOHO सिर्फ एक कंपनी नहीं, ये एक सोच है  कि जो दुनिया को बदलना चाहते हैं, उन्हें किसी बड़े शहर या बड़ी रकम की ज़रूरत नहीं होती। अगर आप भी कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो ZOHO की कहानी से बेहतर उदाहरण शायद ही मिलेगा। तो अगली बार जब कोई कहे “गांव में रहकर कुछ नहीं हो सकता” उसे ZOHO की कहानी जरूर सुनाइए।

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