प्रयागराज में ड्रोन और चोरी की दहशत: रातों की नींद उड़ गई है

प्रयागराज में ड्रोन और चोरी की दहशत: रातों की नींद उड़ गई है

“अरे देखो-देखो ड्रोन उधर उड़ रहा है!”
“छत से कुछ गिरा क्या?”
“कौन है वो अंधेरे में?”

इन दिनों प्रयागराज के गांवों और कस्बों में ऐसे ही शोर-शराबे आम हो गए हैं। सूरज ढलने के बाद माहौल बदल जाता है। पहले जहां लोग छतों पर ठंडी हवा में चैन की नींद लेते थे, अब वहां डर का सन्नाटा है। कोई ड्रोन की अफवाह फैला रहा है, तो कोई चोरों की हलचल देख लेने का दावा कर रहा है।

गांव वाले खुद बन गए चौकीदार

सोरांव, फूलपुर और आसपास के कई गांवों में लोग अब खुद ही पहरेदारी कर रहे हैं। लाठी-डंडे, टॉर्च, सीटी लेकर रातभर सड़क किनारे, गलियों में, खेतों के पास गश्त लगाते हैं। कोई बांस की छड़ी लेकर निकलता है तो कोई लुंगी-कुर्ता पहने आंखों में नींद लिए बैठा रहता है बस चोर दिखे और दबोच लें।

अफवाह है या सच्चाई?

सवाल ये है कि ये सब अफवाह है या वाकई कुछ चल रहा है? कोई पक्की खबर तो किसी के पास नहीं है, लेकिन डर इतना बढ़ गया है कि अब हल्की सी आहट भी गांव वालों को सड़कों पर ला देती है। किसी की छत से कुछ गिरा, किसी के घर के पीछे खड़खड़ाहट हुई — और पूरा गांव इकट्ठा!

“ड्रोन दिखा”, पर कोई सबूत नहीं

कई गांवों में लोग कहते हैं कि “ड्रोन उड़ते देखा गया है”, “उससे कोई देख रहा है”, “उसके बाद ही चोरी हुई” — लेकिन न कोई वीडियो है, न कोई पुख्ता सबूत। पुलिस भी कह रही है कि अब तक ऐसा कुछ मिला नहीं है। वो लोगों से कह रही है कि “घबराएं नहीं, अफवाहों से बचें”। अब छत पर सोना भी बंद

पहले गांवों में लोग गर्मी में छतों पर बिस्तर लगाकर सोते थे, लेकिन अब डर इतना बढ़ गया है कि दरवाजे बंद करके ही नींद आती है — वो भी अधूरी। रात को अगर कोई अनजान आदमी दिख जाए तो लोग सीधे घेर लेते हैं, मारपीट तक की नौबत आ जाती है। डर का आलम ऐसा है कि लोग शक के घेरे में हर अजनबी को देख रहे हैं।

टॉर्च, सीटी, लाठी: गांव वालों का “नाइट किट” रात होते ही गांवों में अलग ही नज़ारा देखने को मिलता है। चार-चार, पांच-पांच लोग टोलियों में निकलते हैं — किसी के हाथ में टॉर्च, किसी के हाथ में सीटी, और सबकी निगाहें किसी हलचल की तलाश में। रात भर गश्त करते हैं और सुबह होते ही घर लौटते हैं।

पुलिस की अपील

प्रशासन की ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि ये सिर्फ अफवाह है। कोई भी बात बिना जांचे न फैलाएं। अगर कोई संदिग्ध चीज़ दिखे तो तुरंत पुलिस को खबर दें। लेकिन गांव वालों का कहना है कि डर तो अपने आप में बहुत बड़ा होता है — चाहे अफवाह हो या सच्चाई।

आज के दौर में जहां एक क्लिक में दुनिया की खबर मिल जाती है, वहीं गांवों में अभी भी डर, अफवाह और चौकसी का दौर चल रहा है। ड्रोन हो या चोर — जब तक हकीकत सामने नहीं आती, तब तक रातें यूं ही बेचैनी में कटेंगी।
और हां, गांव वाले अब सिर्फ सोते नहीं — जागते भी हैं, और जगाते भी हैं।

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