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परेश रावल ने ठुकराई ‘दृश्यम 3’

परेश रावल ने ठुकराई ‘दृश्यम 3’ जब किरदार से जुड़ाव ज़रूरी हो, सिर्फ स्क्रिप्ट नहीं

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता परेश रावल अपने सटीक अभिनय, संवाद अदायगी और अलग सोच के लिए जाने जाते हैं। ‘हेरा फेरी’, ‘OMG’, ‘अतरंगी रे’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने न सिर्फ दर्शकों को हँसाया बल्कि सोचने पर भी मजबूर किया। लेकिन इस बार चर्चा में हैं उनके ना कहने का अंदाज़  जी हाँ, परेश रावल ने ‘दृश्यम 3’ का हिस्सा बनने से मना कर दिया है। जहाँ बॉलीवुड में बड़ी फ्रैंचाइज़ी और मशहूर सीरीज़ का हिस्सा बनने के लिए कई कलाकार बेताब रहते हैं, वहीं परेश रावल ने इसका उल्टा कदम उठाया है। उन्होंने साफ़ कहा  “स्क्रिप्ट बहुत अच्छी थी, लेकिन किरदार मुझे पसंद नहीं आया… मज़ा नहीं आया।”

‘दृश्यम 3’ और परेश रावल का ऑफर- ‘दृश्यम’ श्रृंखला का नाम सुनते ही दर्शकों को एक सस्पेंस-थ्रिलर की याद आ जाती है। अजय देवगन की इस फ्रैंचाइज़ी ने पहले ही दो सुपरहिट किस्तें दी हैं ‘दृश्यम’ (2015) और ‘दृश्यम 2’ (2022)। अब तीसरे भाग की तैयारी चल रही है, जिसमें नए किरदारों को जोड़ने पर विचार हो रहा था। इसी बीच, मेकर्स ने परेश रावल को एक महत्वपूर्ण भूमिका ऑफर की। लेकिन अभिनेता ने सोच-समझकर फैसला लिया और प्रस्ताव ठुकरा दिया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा “हाँ, मुझे फिल्म ऑफर हुई थी। स्क्रिप्ट अच्छी थी, पर जो रोल मेरे लिए था, वह मुझे जँचा नहीं। एक कलाकार के लिए यह जरूरी है कि उसे अपने किरदार से मज़ा आए, नहीं तो दर्शक भी वह ऊर्जा महसूस नहीं कर पाएंगे।”

जब किरदार में ‘कनेक्शन’ महसूस नहीं हुआ

यह बात अपने आप में बहुत कुछ कह जाती है। फिल्म अच्छी हो सकती है, कहानी दमदार, लेकिन अगर किरदार ऐसा न हो जिसमें कलाकार को दिलचस्पी या चुनौती महसूस हो, तो वह काम अधूरा लगता है। परेश रावल का कहना था कि उन्हें भूमिका में “मज़ा” नहीं आया। यह ‘मज़ा’ शब्द सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि artistic satisfaction वह आनंद जो एक कलाकार को तब मिलता है जब वह किरदार के भीतर उतर जाता है। उनके इस बयान ने यह साफ़ कर दिया कि वो फिल्म की सफलता से ज़्यादा किरदार की गहराई को प्राथमिकता देते हैं। यह वही सोच है जो उन्हें आज भी इंडस्ट्री में “एक्टर का एक्टर” बनाती है।

परेश रावल की ईमानदार सोच परेश रावल ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि “कई बार बड़े नाम और बड़ी फिल्मों का हिस्सा बनने का दबाव होता है, लेकिन अगर किरदार में जुड़ाव नहीं है, तो दर्शक भी वो कमी महसूस करते हैं।” यह बात सुनकर लगता है कि आज जब कई कलाकार केवल ब्रांड वैल्यू के लिए फिल्में साइन कर लेते हैं, वहीं परेश रावल अपनी कला से समझौता नहीं करते। उनके करियर में कई ऐसे उदाहरण हैं ‘OMG’ जैसी गंभीर फिल्म में धार्मिक और सामाजिक सवाल उठाने वाला रोल चुनना, या फिर ‘हेरा फेरी’ जैसे कॉमिक किरदारों में भी गहराई बनाए रखना। हर बार उन्होंने वही किया जो दिल कहता है।

‘दृश्यम’ सीरीज़ की सफलता और तीसरे भाग की तैयारी

‘दृश्यम’ फ्रैंचाइज़ी ने बॉलीवुड में सस्पेंस-थ्रिलर की परिभाषा बदल दी। पहली फिल्म में विजय सालगांवकर (अजय देवगन) की बुद्धिमानी और परिवार-प्रेम ने लोगों को हैरान किया था। दूसरे भाग ने भी कहानी को और मजबूत किया  और अब तीसरा भाग इस कहानी को क्लोज़ करने वाला बताया जा रहा है। फिल्म का निर्माण पैनोरमा स्टूडियो कर रहा है और निर्देशन फिर से अभिषेक पाठक के हाथों में है। सूत्रों के अनुसार, फिल्म में कुछ नए चेहरे जोड़े जा रहे हैं और स्क्रिप्ट लगभग तैयार है। लेकिन परेश रावल के इनकार से निश्चित ही मेकर्स को एक झटका लगा है, क्योंकि वे उनकी परफॉर्मेंस को लेकर बहुत उत्साहित थे।

कभी-कभी “ना” कहना भी एक साहसिक कदम होता है। परेश रावल ने साबित कर दिया कि एक सच्चा कलाकार वही है जो अपनी आत्मा से झूठ नहीं बोलता। ‘दृश्यम 3’ उनके बिना भी बनेगी, लेकिन इस ना ने शायद इंडस्ट्री को एक बड़ा सबक दिया है  “अच्छी स्क्रिप्ट ज़रूरी है, पर सही किरदार उससे भी ज़्यादा।”

आपको क्या लगता है  क्या परेश रावल का यह फैसला सही था? क्या एक अनुभवी कलाकार को सिर्फ स्क्रिप्ट देखकर फिल्म करनी चाहिए या किरदार देखकर?

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