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धोनी ड्रॉप नहीं होता, ड्रॉप करता है!

“धोनी ड्रॉप नहीं होता, ड्रॉप करता है!” टीम तो टीम… सेलेक्शन कमिटी तक को बैठा दिया था बाहर!

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का हमारे ब्लॉग द खबरीवाला में आज के इस ब्लॉग में बात करेंगे उस खिलाड़ी की, जो कप्तान नहीं… खुद में एक पूरा युग था: ‘Captain Cool’ धोनी की!

“कैप्टन कूल” तो सब कहते हैं, लेकिन असल में वो था – क्रिकेट का ‘बॉस ऑफ द बॉसेज़’!”

जब बात महेंद्र सिंह धोनी की होती है, तो लोग अक्सर उनके शांत चेहरे, आखिरी गेंद पर सिक्स मारने वाले स्टाइल या हेलीकॉप्टर शॉट को याद करते हैं। लेकिन जो असली बात क्रिकेट की कुर्सियों के पीछे छुपी है वो आम फैंस को नहीं बताई जाती। और वो ये है कि… धोनी कभी टीम से ड्रॉप नहीं हुआ… वो जिसे चाहता था, उसे टीम में लाता था। और जिसे नज़रअंदाज़ करता था, वो BCCI के दरवाज़े पर सिर पीटता रह जाता था।

ना कोई कप्तान उससे पहले ऐसा आया, ना बाद में आ पाएगा!

कप्तानी में आया तो सौरव गांगुली जैसे दिग्गजों को रिप्लेस कर दिया। टेस्ट से संन्यास लिया तो चुपचाप- बिना किसी शोर के, लेकिन ऐसा टाइम चुना कि सब सन्न रह गए। और ODI-T20 की कप्तानी छोड़ी तो ऐसे कि विराट कोहली को टीम मिली भी, तो पीछे से डोर वहीं से हिलती रही।धोनी के दौर में सेलेक्शन कमिटी एकदम कठपुतली बन गई थी। जो धोनी बोले, वही स्क्वॉड। जिसे चाहता था मौका मिलता, चाहे वो जोगिंदर शर्मा हो या रविंद्र जडेजा।

टीम तो टीम… सेलेक्शन कमिटी तक को कर दिया था बाहर और आज रोहित को भी नहीं बख्शा गया!

“वो वक्त कुछ और था… जब कप्तान की आंखों में देखकर सेलेक्टर भी सवाल नहीं पूछते थे। आज रोहित जैसे दिग्गज को भी कह दिया गया- ‘थैंक यू, अब बहुत हो गया।’”

आज रोहित को हटाया गया, लेकिन एक समय था… आज की तारीख में देखो  रोहित शर्मा, जिसने भारत को 2023 वर्ल्ड कप में फाइनल तक पहुंचाया, 2024 T20 वर्ल्ड कप जिताया, टीम को फिर से जोड़ा, लड़ाया और जिताया…

उसी रोहित को कप्तानी से “शांति से” हटा दिया गया। ना कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस, ना विदाई, ना वजह… बस एक सीनियर खिलाड़ी को साइड लाइन कर दिया गया। BCCI की यही स्टाइल रही है  लेकिन एक नाम ऐसा था जो इस सिस्टम से ऊपर था।

वो नाम था – महेंद्र सिंह धोनी- धोनी जब कप्तान था: किसी सेलेक्टर की इतनी हिम्मत नहीं थी कि कप्तानी पर सवाल उठा दे। धोनी जिसे टीम में लाना चाहता, वो आता। जिसे वो बाहर देखना चाहता, वो “घुटने टेकता हुआ” बाहर चला जाता। और जिसने माही को हटाने की सोची  उसे BCCI की दीवार से सटा दिया गया।  धोनी के दौर में कप्तान को हटाने का मतलब था अपने ही। करियर खतरे में डालना

 

जिसने माही को हटाने की सोची… वो खुद हट गया! क्रिकेट इतिहास का एक किस्सा तो इतना मशहूर है कि आज भी BCCI में कोई पुराना मेंबर दबी जुबान में बताता है “जब एक सेलेक्शन कमिटी ने धोनी की कप्तानी पर सवाल उठाने की कोशिश की… तो अगली मीटिंग से पहले वो कमिटी ही भंग कर दी गई। और अगले 3 साल तक कोई भी सेलेक्टर धोनी से सवाल पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाया!”

सोचिए वो दौर जब टीम इंडिया का कप्तान सेलेक्टर्स को ड्रॉप कर देता था!

धोनी की सबसे बड़ी ताकत: दिमाग और दांव- धोनी सिर्फ क्रिकेटर नहीं था वो प्लानर, प्रेसीडेंट, पॉलिटिशियन, पिक्चर परफेक्ट प्लेयर सब कुछ था। हर खिलाड़ी का माइंडरीडर कब किसका टाइम है, किसका वक्त खत्म हुआ, उसे पता होता था। हर युवा टैलेंट का गॉडफादर जैसे हार्दिक, भुवी, चहल, कुलदीप, सबका डेब्यू उनके भरोसे पर हुआ। और हर वरिष्ट खिलाड़ी का क्लोज़र चाहे वो वीरू हों, युवराज, या गंभीर… जब माही को लगा कि ‘अब बहुत हो गया’, तो “बिना बोले विदाई” करवा दी।

धोनी का रुतबा ऐसा था कि… ड्रेसिंग रूम में सबसे आखिरी में आता और सबसे पहले सबको पढ़ लेता। कप्तानी छोड़ दी, लेकिन मैदान में फिल्ड सेटिंग अब भी वही करता था। सेलेक्टर बदल गए, कप्तान बदल गया, कोच बदल गया लेकिन टीम का DNA माही के हाथ में ही रहा।

माही के बाद कोई नहीं! धोनी ने कभी खुद को कुर्सी से चिपकाकर नहीं रखा, लेकिन जब तक रहा पूरा सिस्टम उसी की उंगली पर नाचता रहा। क्योंकि माही जानता था  “Authority is not given, it’s taken.”

धोनी सिर्फ खिलाड़ी नहीं था, एक संस्था था। वो मैदान पर जितना चुप, उतना ही BCCI के अंदर पावरफुल। जिसने सेलेक्टर हटाए, कप्तान बनाए, करियर खत्म किए और इतिहास रच दिया बिना शोर, बिना ड्रामा। और यही तो माही का स्टाइल था।

अब बोलिए  क्या सच में महेंद्र सिंह धोनी से बड़ा ताक़तवर कप्तान भारत क्या, पूरे विश्व क्रिकेट में कोई हुआ है?

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