व्हाट्सअप को टक्कर देने आई भारत की देशी ऐप्स-Arattai
नई दिल्ली, अक्टूबर 2025- कुछ साल पहले तक जब भी हम चैटिंग, कॉलिंग या फाइल भेजने की बात करते थे, तो हमारी ज़ुबान पर बस एक ही नाम आता था – व्हाट्सऐप। लेकिन अब हवा बदल रही है। लोग अब “कहाँ से बना है?”, “किसका ऐप है?”, और “डाटा कहाँ जा रहा है?” जैसे सवाल पूछने लगे हैं। और इसी सोच के साथ वापस लौट रही है देशी ऐप्स की ताकत। Arattai, Sandes, Bharat Messenger, और दूसरे भारतीय चैट ऐप्स को अब लोग न सिर्फ आजमा रहे हैं, बल्कि पसंद भी कर रहे हैं।
क्यों लौट रहे हैं लोग देशी ऐप्स की तरफ ?- विदेशी ऐप्स पर प्राइवेसी को लेकर कई बार सवाल उठे “आपकी बातें सुनी जा रही हैं”, “आपका डेटा बेचा जा रहा है” जैसी खबरें आईं। ऐसे में लोग सोचने लगे, “हमारी बातें, हमारी फोटो, हमारी ज़िंदगी… किसी और देश के सर्वर पर क्यों?”
‘Made in India’ वाला फीलिंग – आज का युवा सिर्फ ‘स्मार्ट’ नहीं, ‘सजग’ भी है। वह जानता है कि जो पैसा, डेटा और सपोर्ट हम विदेशी ऐप्स को देते हैं, वही अगर देशी ऐप्स को मिले, तो देश की टेक्नोलॉजी और इकोनॉमी दोनों आगे बढ़ेंगे।
सरल इंटरफेस + भारतीय भाषाओं का सपोर्ट Arattai जैसे ऐप्स अब 10+ भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं। गाँव में रहने वाला व्यक्ति भी बिना झिझक चैट कर सकता है। न अंग्रेज़ी चाहिए, न झंझट — सब कुछ अपने हिसाब से।
Arattai – बात भी, सुरक्षा भी, और अब देशी भी!
Arattai (तमिल में जिसका मतलब होता है ‘चैट करना’) भारत का एक चैटिंग ऐप है जिसे Zoho कंपनी ने बनाया है। इस ऐप की खास बात ये है कि:
पूरा डेटा भारत में स्टोर होता है कोई विज्ञापन नहीं, कोई ट्रैकिंग नहीं हल्का, तेज़ और आसान स्कूल, कॉलेज और ऑफिस यूज़र्स के लिए खास फीचर
डेटा अब गोल्ड है – और हम अपना गोल्ड दूसरों को क्यों दें? आज के दौर में डेटा किसी खजाने से कम नहीं। जो ऐप हमारे मेसेज, लोकेशन, फोटो और कॉन्टैक्ट्स को एक्सेस करता है- वह चाहे तो हमारे बारे में सब कुछ जान सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि डेटा सुरक्षा कोई फैंसी टर्म नहीं, बल्कि आम आदमी के हक की बात है।
‘देशी’ का मतलब सिर्फ ऐप नहीं, एक भरोसा है देशी ऐप का मतलब सिर्फ ये नहीं कि उसे भारत में बनाया गया। इसका मतलब है: हमारी भाषा में बात हो सके हमारी संस्कृति को समझे हमारी प्राइवेसी की इज्ज़त करे और जब कोई दिक्कत हो, तो कॉल या मेल करने पर कोई हमारी भाषा में जवाब दे ये वो चीजें हैं, जो अक्सर विदेशी कंपनियों में नहीं मिलतीं।
अब वक्त है सोच बदलने का- हमने देखा है कि कैसे TikTok बैन हुआ और फिर भारतीय ऐप्स जैसे Chingari, Josh आए। उसी तरह अब चैटिंग और कॉलिंग में भी बदलाव आ रहा है। धीरे-धीरे ही सही, लोग अब पूछने लगे हैं: “क्या कोई भारतीय ऑप्शन है?” और जब सवाल उठता है, तो जवाब भी आता है। और जवाब है हाँ, है!
टेक्नोलॉजी का उपयोग ज़रूरी है, लेकिन समझदारी के साथ हम मोबाइल के इतने आदि हो गए हैं कि अब हर चीज़ ऐप के जरिए होती है – बच्चों की पढ़ाई से लेकर बुजुर्गों की दवाई तक। ऐसे में जरूरी है कि हम ये भी सोचें कि किस ऐप को हम अपनी ज़िंदगी तक पहुँचने दे रहे हैं। अगर देशी ऐप विकल्प दे रहे हैं, तो उन्हें मौका देना सिर्फ एक टेक्निकल डिसीजन नहीं, एक जिम्मेदारी भी है।

