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सोने की चमक अब आंखों में नहीं, अखबारों में है

सोने की चमक अब आंखों में नहीं, अखबारों में है– एक ज़माना था जब शादी-ब्याह की बात होती थी, तो घर की बुज़ुर्ग महिलाएं अलमारी में रखे छोटे से डिब्बे को खोलती थीं  जिसमें दो-चार चूड़ियाँ, एक चैन और कुछ पुरानी यादें रखी होती थीं। वो कहती थीं, “ये सोना नहीं, हमारी इज़्ज़त है।”

लेकिन आज… वही सोना सिर्फ अख़बारों की हेडलाइंस और गहनों की दुकानों की शीशों के पीछे चमकता दिखाई देता है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना अब 1,21,799 रुपए तक पहुंच चुका है। सिर्फ इस हफ्ते में ही 1,858 रुपए की बढ़त दर्ज की गई है।

सोने की कीमत में इस साल अब तक 45,637 रुपए का इज़ाफा हो चुका है। 31 दिसंबर 2024 को यही सोना 76,162 रुपए में मिलता था।

चांदी भी पीछे नहीं- सोचिए, एक ज़माने में ‘गरीबों का सोना’ कही जाने वाली चांदी की हालत भी कुछ खास नहीं है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी 86,017 रुपए की थी, अब वो बढ़कर 1,50,783 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुकी है – यानी 64,766 रुपए की बढ़त।

मध्यम वर्ग की दूरी बढ़ी, सपने छूटे

हमारे जैसे आम लोगों के लिए, अब सोना ‘इन्वेस्टमेंट’ या ‘सजावट’ का सामान नहीं रहा – बल्कि एक “कभी हुआ करता था” वाली चीज बन गया है। अब न बेटी की शादी की सोच में वो चमक बची है, न त्योहारों पर खरीदी जाने वाली ‘छोटी सी अंगूठी’ की ख्वाहिश। कुछ लोगों के लिए तो अब गहनों की दुकानों के बाहर रुककर vitrines देखना ही सबसे बड़ी ख़ुशी है। क्योंकि अंदर जाने से पहले जेब देखनी पड़ती है, और दिल समझाना पड़ता है। कभी घर की शान, अब बस यादें बची हैं जहां पहले माएं और दादियां सोने को बचा-बचा कर रखती थीं, वहीं अब नई पीढ़ी सोचती है – “क्या ज़रूरत है गहनों की, निवेश तो डिजिटल गोल्ड या म्यूचुअल फंड में बेहतर है।”

शायद यही वक्त है जब हम मान लें – “अब सोना नहीं, उसकी यादें संभालने का वक्त है।” क्योंकि सोना अब जेब की चीज नहीं, सिर्फ दिल की बात बन चुका है।

बदलते वक़्त के साथ ज़रूरतें और प्राथमिकताएं बदलती हैं, लेकिन कुछ चीजें सिर्फ चीजें नहीं होतीं – वो एहसास होती हैं। सोना भी अब उन्हीं में से एक हो चला है। जैसे कुछ लोग अपने बचपन की तस्वीरें संभालते हैं, वैसे ही अब शायद अगली पीढ़ी अपने दादी-नानी के गहनों की यादें संजोकर रखेगी एक खूबसूरत बीते हुए वक़्त की तरह।

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