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सिक्योरिटी गार्ड से चीफ सॉफ्टवेयर इंजीनियर तक का सफर

सिक्योरिटी गार्ड से चीफ सॉफ्टवेयर इंजीनियर तक का सफर: Zoho के उस हीरो की कहानी जिसने सबको चौंका दिया!

“कभी-कभी डिग्रियां नहीं, जिद और जुनून ही आपकी सबसे बड़ी योग्यता होती है।”

चेन्नई के पास स्थित एक छोटे से गांव से निकलकर एक शख्स ने वो कर दिखाया, जो आमतौर पर सिर्फ फिल्मों में ही देखने को मिलता है। ये कहानी है अब्दुल अलीम, जो कभी ज़ोहो (Zoho Corporation) में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी किया करते थे और आज उसी कंपनी में चीफ सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर काम कर रहे हैं।

कहां से शुरू हुई कहानी?– करीब 10 साल पहले, अब्दुल अलीम को एक प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी के ज़रिए Zoho के चेन्नई ऑफिस में गार्ड की नौकरी मिली थी। कम पढ़े-लिखे, बिना किसी टेक्निकल बैकग्राउंड के, लेकिन आंखों में एक चमक और दिल में एक ख्वाब था  कुछ बड़ा करने का।

ऑफिस के बाहर खड़े रहते हुए उन्होंने देखा कि अंदर लोग लैपटॉप पर काम करते हैं, कोड लिखते हैं, और कुछ नया बनाते हैं। यहीं से जिज्ञासा ने जन्म लिया। रात की शिफ्ट में ड्यूटी करने के बाद वो दिन में इंटरनेट कैफे जाकर कोडिंग सीखते थे  कभी फ्री यूट्यूब वीडियोज़ से, तो कभी ऑनलाइन ब्लॉग्स से। उनके पास लैपटॉप भी नहीं था। धीरे-धीरे उन्हें C, Java, और फिर Python जैसी भाषाएं आने लगीं।

Zoho के कुछ इंजीनियर्स ने उनकी लगन देखी और उन्हें गाइड करना शुरू किया। उन्हें कोड दिखाया, समझाया, और एक बार कहा, “तू कोशिश कर, हम हैं तेरे साथ।”

 

पहला मौका एक दिन Zoho के एक इंटरनल हैकथॉन में एक टीम को एक असिस्टेंट की ज़रूरत थी, जो बेसिक लेवल पर कुछ स्क्रिप्टिंग कर सके। अब्दुल अलीम, को वॉलंटियर के तौर पर शामिल किया गया। उनके काम ने टीम को इतना इंप्रेस किया कि एक सीनियर डेवलपर ने उनकी सिफारिश की और यहीं से उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल गई।

आज क्या कर रहे हैं? आज श्रीनिवासन, Zoho के एक कोर प्रोडक्ट पर काम कर रहे हैं। चीफ सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में वह 25 लोगों की टीम लीड कर रहे हैं। उनकी कहानी अब कंपनी के नए जॉइन करने वालों को इंस्पिरेशन के तौर पर सुनाई जाती है।

अब्दुल अलीम क्या कहते हैं? “मुझे आज भी वो रातें याद हैं जब मैं कोडिंग के टर्म्स तक नहीं समझता था। लेकिन हार नहीं मानी। मुझे बस सीखना था। Zoho ने मुझे प्लेटफॉर्म दिया, और मैंने खुद को साबित किया।”

कहानी से सीख क्या है? डिग्री नहीं, स्किल और लगन असली पहचान होती है। अगर कोई मौका न दे, तो खुद खुद को मौका देना सीखो। और सबसे ज़रूरी अगर आप सीखना चाहते हैं, तो कोई भी चीज़ नामुमकिन नहीं है।

अब्दुल अलीम सिर्फ एक इंसान नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की रौशनी हैं, जो छोटी जगहों से बड़े ख्वाब लेकर निकलते हैं। सलाम है ऐसे जज़्बे को!

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