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फिर हट गया नकाब! Drishti IAS पर CCPA का एक और शिकंजा

फिर हट गया नकाब! Drishti IAS पर CCPA का एक और शिकंजा – 5 लाख का जुर्माना, ‘भ्रामक दावे’ बने वजह

देश के लाखों UPSC छात्रों के बीच मशहूर Drishti IAS कोचिंग संस्थान, जो अपने प्रभावशाली ब्रांडिंग और करिश्माई चेयरमैन डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के लिए जाना जाता है, एक बार फिर कानूनी शिकंजे में फंस गया है।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने संस्थान पर 5 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है। आरोप सीधा और साफ है भ्रामक विज्ञापन, जिसमें छात्रों की मेहनत को संस्थान की “कामयाबी” के रूप में बेचा गया।

विज्ञापन में 216 PLUS सेलेक्शन का दावा, पर हकीकत में सिर्फ़ 54?

Drishti IAS ने अपने विज्ञापनों में यह ज़ोर-शोर से प्रचारित किया कि उसके 216 PLUS छात्र UPSC में सफल हुए। लेकिन CCPA की जांच में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई: इन 216 में से 162 छात्र सिर्फ फ्री इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम का हिस्सा थे। जबकि Drishti के मुख्य पेड कोर्स से सेलेक्ट होने वाले छात्रों की संख्या सिर्फ 54 थी। यानि कि जिन्होंने केवल एक सेशन अटेंड किया, उनका भी नाम इस तरह जोड़ा गया, जैसे सफलता पूरी तरह संस्थान की देन हो।

“छात्रों की मेहनत पर संस्थान की ब्रांडिंग”- CCPA का दो टूक जवाब

CCPA ने साफ कहा है कि:- “इस तरह का विज्ञापन छात्रों की व्यक्तिगत मेहनत को दरकिनार कर, सफलता का क्रेडिट संस्थान को देता है जो कि न सिर्फ़ ग़लत है, बल्कि भ्रामक भी। यह एक गैर-जिम्मेदार और लाभ के लिए तैयार किया गया मार्केटिंग हथकंडा है।”

पहले भी पड़ चुकी है गाज – सितंबर 2024 में 3 लाख की पेनल्टी ये कोई पहली बार नहीं है जब Drishti IAS को चेतावनी दी गई है। सितंबर 2024 में भी इसी तरह के गुमराह करने वाले प्रचार के चलते संस्थान पर ₹3 लाख का जुर्माना लगाया गया था। लगातार चेतावनियों के बावजूद दोबारा वही गलती दोहराना सवाल खड़े करता है: क्या यह जानबूझकर किया गया प्रोपेगेंडा है, या सिस्टम की अनदेखी?

छात्रों के मन में सवाल “किस पर भरोसा करें?”– आज का स्टूडेंट बेहद समझदार है। वह जानता है कि UPSC जैसी परीक्षा में सफलता किसी कोचिंग सेंटर के विज्ञापन से नहीं, बल्कि अपनी कड़ी मेहनत, संघर्ष और ईमानदार मार्गदर्शन से मिलती है। लेकिन जब बड़े-बड़े नाम और चेहरे “आधे सच” को पूरी सफलता की तरह पेश करें, तो नये छात्र गुमराह हो सकते हैं।

एक छात्र ने सोशल मीडिया पर लिखा:- “हमसे कहा गया कि यहां से 200 PLUS सेलेक्शन होते हैं… अब समझ आया कि उसमें से कई ने सिर्फ़ एक फ्री क्लास अटेंड की थी।”

ब्रांड से ज़्यादा ज़रूरी है भरोसा Drishti IAS जैसे संस्थान, जिनका नाम शिक्षा जगत में एक बड़ा ब्रांड बन चुका है, अगर भरोसे के साथ खिलवाड़ करते हैं, तो इसका नुकसान सिर्फ छात्रों को ही नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा क्षेत्र की साख को होता है। सिर्फ कैमरे पर ज्ञान बांटने और डायलॉग कहने से नहीं, बल्कि ईमानदार गिनती, पारदर्शिता और नैतिक जवाबदेही से ही एक संस्थान बड़ा बनता है।

आखिर में…भविष्य की पीढ़ी को राह दिखाने वाले संस्थानों से समाज को उम्मीद होती है कि वे सिर्फ टॉपर्स की तस्वीरें नहीं, बल्कि सच की नींव पर अपनी इमारत खड़ी करें।

Drishti IAS जैसी संस्थाएं अगर बार-बार गलती करेंगी, तो फिर सवाल छात्रों पर नहीं, पूरे कोचिंग सिस्टम पर उठेगा। चमकती मार्केटिंग से ज़्यादा जरूरी है – सच्ची मेंटरशिप।

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