“नया आलू” नहीं, जहर का खेल: गोरखपुर मंडी से खुली साजिश की परत
“देखो कितना चमचमाता है नया आलू! एकदम ताजा लग रहा है न?” मंडी के दुकानदार बड़े भरोसे से बोलते हैं, ग्राहक भी खुश होकर थैले में भर लेते हैं। लेकिन अब सावधान होने की जरूरत है, क्योंकि ये चमकता-दमकता आलू असल में ‘नया’ नहीं, ‘जहरीला’ है। इस पर जो चमक दिखती है, वो रसायनों की चालाकी है और सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
गोरखपुर से खुलासा: 500 क्विंटल जहरीला आलू जब्त
रविवार को गोरखपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जब आलू मंडी में छापा मारा, तो मामला हिलाकर रख देने वाला निकला। दो बड़े ट्रक पकड़े गए, जिनमें 500 क्विंटल से ज़्यादा आलू लदे थे। ये आलू तमिलनाडु के वेल्लौर और यूपी के फर्रुखाबाद से लाए गए थे।
जांच में सामने आया कि ये आलू असली नए आलू नहीं थे, बल्कि पुराने आलू पर केमिकल डालकर उसका छिलका उतारा गया था, ताकि वह नया जैसा दिखे।
कैसे बनता है ‘नया जैसा’ आलू?
असल में नया आलू और पुराना आलू दिखने में काफी अलग होते हैं। नए आलू का छिलका पतला और मुलायम होता है उंगली से रगड़ो तो उतर जाता है। लेकिन जो आलू मंडियों में बिक रहा है, उसमें रसायन मिलाकर छिलका जबरन उतारा गया है, ताकि वो नया दिखे। इसकी चमक कृत्रिम है, और यही सबसे बड़ा धोखा है।
जैसे पुराने चावल में पानी छिड़ककर उसे नया बनाने की चाल होती है, वैसे ही अब पुराने आलू को नया दिखाने की मिलावटबाज़ी शुरू हो गई है।
क्या नुकसान हो सकता है इस केमिकल से?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे केमिकल्स का सीधा असर लीवर, किडनी और पाचन तंत्र पर पड़ता है। बच्चों और बुज़ुर्गों में तो यह और भी खतरनाक हो सकता है — फूड पॉइज़निंग, पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और यहां तक कि गंभीर बीमारियों तक की नौबत आ सकती है।
छोटा-सा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है — और ये बात चौंकाने वाली है।
20 रुपए किलो का मुनाफा -सेहत की कीमत पर जिस आलू की असली कीमत मंडी में 30-35 रुपए किलो है, वही केमिकल वाला आलू नया बताकर 50 रुपए किलो में बेचा जा रहा है। ग्राहक सोचता है कि थोड़ा महंगा मिल रहा है, लेकिन ताजा है जबकि हकीकत उल्टी है।
अब सवाल उठते हैं…
मंडियों में रोज़ाना हज़ारों किलो आलू बिक रहे हैं क्या हर जगह ये जांच हो रही है? जो व्यापारी जानबूझकर ये केमिकल छिड़क रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी? और सबसे जरूरी सवाल: जनता को कैसे पता चले कि कौन सा आलू असली है, कौन सा नकली?
किसानों का नुकसान, व्यापारियों का फायदा
नए आलू असल में अभी बहुत कम मात्रा में आ रहे हैं, क्योंकि फसल का मौसम पूरा नहीं हुआ है। लेकिन व्यापारी ‘नया आलू’ कहकर पुराना माल बेच रहे हैं। इससे असली किसान का आलू तो बिक ही नहीं पाता, और फायदा उठाते हैं मिलावटबाज़।
अब जनता को जागरूक होना होगा
सरकार और विभागों की जिम्मेदारी है कि इस तरह की मिलावट को रोके, लेकिन जब तक जनता खुद जागरूक नहीं होगी, तब तक ये धंधा नहीं रुकेगा।
अगर आलू बहुत ज़्यादा चमक रहा है, एक जैसे आकार का है और छिलका बिना रगड़े ही साफ है तो सतर्क हो जाइए। हर बार जब हम सब्जी खरीदते हैं, तो भरोसे के साथ घर लाते हैं कि ये हमारे परिवार के लिए अच्छी होगी। लेकिन अब बाजार में ऐसा कुछ चल रहा है, जो
सिर्फ जेब का नहीं, सेहत का भी नुकसान कर रहा है।
नया आलू चाहिए, लेकिन जहरीला नहीं।
मुनाफा कमाइए, लेकिन इंसानियत मत भूलिए।