“एक दिन मैं कप्तान बनना चाहता हूं”: यशस्वी जायसवाल का सपना अब सिर्फ रन बनाना नहीं, टीम बनाना है
रिपोर्ट: [The Khabariwala]
भारतीय क्रिकेट को हमेशा से ऐसे खिलाड़ी देते रहे हैं जिन्होंने न सिर्फ बल्ले से कमाल किया, बल्कि टीम को दिशा भी दी। अब इस कड़ी में एक नया नाम जुड़ने की तैयारी में है यशस्वी जायसवाल। बल्लेबाजी की शानदार शुरुआत करने वाले इस युवा खिलाड़ी की आंखों में अब कप्तानी का सपना भी है। हाल ही में बिजनेस इंफ्लुएंसर राज शमानी के पॉडकास्ट में उन्होंने जो बातें कहीं, वो सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि एक इंसान की सोच, अनुशासन और आत्मविश्वास का आईना हैं।
“हर दिन खुद पर काम करना है…”
पॉडकास्ट में यशस्वी ने कहा:- “इस समय मैं अपनी फिटनेस पर काफी ध्यान दे रहा हूं। मैं अपने शरीर को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश कर रहा हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि समय के साथ फिट रहना और अपनी स्किल्स पर और ज्यादा मेहनत करना जरूरी है। हर दिन मुझे खुद पर काम करना है ताकि मैं एक लीडर के रूप में खुद को विकसित कर सकूं। एक दिन मैं कप्तान बनना चाहता हूं।” ये शब्द सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक हैं जो खिलाड़ी को लीजेंड बनाती है।
बहुत से खिलाड़ी अपने करियर की शुरुआत शानदार करते हैं, लेकिन बहुत कम ही ऐसे होते हैं जो शुरू से ही खुद को टीम से ऊपर उठाकर एक लीडर की जिम्मेदारी उठाने की तैयारी करते हैं। यशस्वी का यह बयान ये दिखाता है कि उनके लिए क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि सेवा और नेतृत्व का माध्यम है।
फिटनेस और माइंडसेट: लीडरशिप की असली नींव आज के क्रिकेट में सिर्फ टैलेंट काफी नहीं। कप्तानी सिर्फ टॉस जीतने और फील्डिंग सेट करने तक सीमित नहीं रह गई है। उसमें स्ट्रैटेजी, टीम को समझना, खुद को हर हाल में संतुलित रखना और बाकी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनना शामिल है। यशस्वी इसी दिशा में काम कर रहे हैं वे सिर्फ रन नहीं बना रहे, अपने भीतर एक लीडर को गढ़ रहे हैं।
झुग्गी से लेकर इंटरनेशनल ड्रेसिंग रूम तक का सफर– यह मत भूलिए कि यशस्वी जायसवाल ने अपना सफर झुग्गियों से शुरू किया था, जहां वो मैदान के पास पानी-पूरी बेचकर अपने सपनों को जिंदा रखते थे। ऐसे इंसान के लिए कप्तानी का सपना दबाव नहीं, बल्कि उसकी मेहनत का नेक्स्ट स्टेप है। उनका संघर्ष ही उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है। कप्तानी का सपना इसलिए खास है, क्योंकि ये किसी सुविधा में पले-बढ़े लड़के का ख्वाब नहीं, बल्कि ज़मीन से निकले उस इंसान का इरादा है जिसने हर मोड़ पर खुद को साबित किया है।
आज यशस्वी जायसवाल सिर्फ एक शानदार ओपनर नहीं हैं – वे एक सोच हैं, जो बताती है कि सपने कितने भी बड़े क्यों न हों, अगर मेहनत और इरादा हो, तो वो हकीकत बन सकते हैं। कप्तानी का सपना कोई जल्दी पूरी होने वाली बात नहीं, लेकिन जिस संजीदगी और आत्मनिरीक्षण के साथ यशस्वी इस बारे में सोच रहे हैं, वो दिखाता है कि भारतीय क्रिकेट को आने वाले सालों में एक शांत, परिपक्व और मेहनती लीडर मिल सकता है। और शायद, वो दिन दूर नहीं जब टॉस के लिए मैदान पर विराट या रोहित नहीं, जायसवाल नजर आएंगे।